By RamthaMedia
RamthaMedia Free eBooks · August 2026
Price: Priceless
· 12 min read
Preface
यह किताब उस भारतीय कारोबारी के लिए है जिसने रेज़रपे से अपने पैसे का हिसाब चलाने का फैसला कर लिया है, लेकिन अभी KYC, सदस्यता, पेआउट और पेरोल के बीच उलझा हुआ है। पढ़ने के बाद आप खाता खोलने से लेकर पहला वेतन भेजने तक हर कदम पहचान पाएंगे, और वह सीमा भी जान लेंगे जहाँ रेज़रपे रुक जाता है और बाकी काम आपको खुद करना पड़ता है। यह किताब हर राज्य की पेशेवर टैक्स दर या हर बैंक की डाउनटाइम सूची नहीं देती – उसके लिए साइट का अपना हेल्प सेंटर है।
Chapter 1
जब आप ऑनलाइन पैसे लेने का फैसला करते हैं
कपड़ों की एक छोटी दुकान चलाने वाली रीना अब तक सिर्फ नकद में बिक्री करती थीं। जब उनके ग्राहकों ने ऑनलाइन ऑर्डर मांगना शुरू किया, तो उन्हें एक ऐसा तरीका चाहिए था जिससे पैसा सीधे उनके बैंक खाते में आए, बिना किसी अलग गेटवे कंपनी से बार-बार बात किए। यही वह जगह है जहाँ ज़्यादातर कारोबारी रेज़रपे से पहला परिचय पाते हैं।
साइन अप करने के बाद सबसे पहला काम पहचान की पुष्टि, यानी KYC, है। यहाँ एक नया रास्ता जुड़ा है – सेंट्रल KYC रजिस्ट्री (CKYC)। अगर आपका बैंक, म्यूचुअल फंड या बीमा कंपनी में पहले से CKYC रिकॉर्ड मौजूद है, तो सिर्फ PAN नंबर और कंपनी की स्थापना तारीख डालने पर ज़्यादातर दस्तावेज़ अपने आप आ जाते हैं, और वीडियो KYC की ज़रूरत पूरी तरह टल जाती है।
जिनका ऐसा रिकॉर्ड नहीं है, उनके लिए पुराना तरीका ही बचता है – बुनियादी जानकारी, कारोबार की जानकारी, दस्तावेज़ और फिर वीडियो KYC। दोनों ही रास्तों में जानकारी किसी भी क्रम में दी जा सकती है; खाता बनाते समय दी गई डिटेल को बाद में बदलना भी संभव है।
खाता बनने के बाद वह एक तय क्रम से गुजरता है – under_review यानी जांच जारी है, needs_clarification यानी कुछ स्पष्टीकरण चाहिए, activated यानी अब भुगतान और सेटलमेंट दोनों चालू, suspended यानी जोखिम की वजह से रोका गया, और rejected यानी जमा किए गए दस्तावेज़ स्वीकार नहीं हुए। हर स्थिति का मतलब जानना इसलिए ज़रूरी है, ताकि 'खाता क्यों नहीं चल रहा' का जवाब खुद मिल सके, सपोर्ट को लिखने से पहले।
जिन कारोबारियों के पास एक ही मोबाइल नंबर पर कई अलग व्यवसाय हैं, उनके लिए मल्टी-अकाउंट सुविधा नया सिम खरीदने की मजबूरी हटा देती है – वही नंबर और ईमेल दोबारा इस्तेमाल हो सकते हैं। पर एक शर्त है: अगर वही नंबर पहले से अलग-अलग ईमेल से कई खातों में जुड़ा है, तो यह सुविधा काम नहीं करती।
जिनके पास दस्तावेज़ भरने का समय नहीं है, वे शुल्क देकर एक ऑनबोर्डिंग मैनेजर रख सकते हैं जो साइन-अप से सक्रियण तक हर कदम पर साथ चलता है। यह अगला अध्याय ठीक वहीं से शुरू होता है – असल में कौन-से कागज़ात चाहिए, और वह सूची कारोबार के प्रकार के साथ क्यों बदल जाती है।
What you can actually do here
रेज़रपे केवल एक 'पेमेंट बटन' नहीं है। नीचे वे काम हैं जो साइट असल में करती है, समूहों में बांटे गए हैं, ताकि आप अपनी स्थिति ढूंढकर सीधे उस अध्याय पर जा सकें।
खाता खोलना और पहचान जांच
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| CKYC रिकॉर्ड से मिनटों में खाता सक्रिय करना | जिनका बैंक या म्यूचुअल फंड में पहले से CKYC रिकॉर्ड है | साइन अप → PAN और इनकॉर्पोरेशन तारीख डालें → दस्तावेज़ अपने आप आ जाते हैं | वीडियो KYC पूरी तरह टाला जा सकता है रिकॉर्ड न होने पर पुराना तरीका ही चलेगा |
| एक ही मोबाइल नंबर पर कई खाते चलाना | एक मालिक के कई अलग कारोबार | डैशबोर्ड → मल्टी-अकाउंट → वही नंबर और ईमेल दोबारा इस्तेमाल करें | नया सिम खरीदने की ज़रूरत नहीं अगर नंबर पहले से अलग-अलग ईमेल से जुड़ा है तो यह काम नहीं करेगा |
| शुल्क देकर ऑनबोर्डिंग मैनेजर रखना | वे जो दस्तावेज़ीकरण में समय नहीं देना चाहते | साइन अप → Assisted Onboarding चुनें | अतिरिक्त शुल्क लगता है, राशि साइट पर नहीं बताई गई |
सदस्यता और नियमित भुगतान
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| एक बार की बिक्री को मासिक/वार्षिक सदस्यता में बदलना | SaaS और सदस्यता आधारित कारोबार | डैशबोर्ड → Plan बनाएं → Subscription बनाएं → ग्राहक को अधिकृत भुगतान भेजें | क्वांटिटी और शुरुआत की तारीख दोनों बदली जा सकती हैं created या pending स्थिति में सदस्यता को अपडेट नहीं किया जा सकता |
| UPI ऑटोपे से बिना कार्ड के नियमित कटौती | वे ग्राहक जो कार्ड नहीं, UPI से भुगतान करना पसंद करते हैं | चेकआउट → पेमेंट मेथड में UPI सक्षम करें | हर बैंक-ऐप जोड़ी UPI ऑटोपे को सपोर्ट नहीं करती |
| चालू सदस्यता की योजना बीच में बदलना | वे ग्राहक जो प्लान अपग्रेड/डाउनग्रेड करते हैं | Subscription → Update → Immediately या अगले बिलिंग साइकल पर लागू करें | क्रेडिट नोट से अतिरिक्त राशि अपने आप वापस होती है राशि का अंतर आधे रुपये से कम होने पर अपडेट फेल होता है |
| फेल हुए भुगतान को अपने आप दोबारा कोशिश करना | वे कारोबार जो मैन्युअल फॉलो-अप नहीं करना चाहते | वेबहुक subscription.pending / subscription.halted सक्षम करें | असफल कार्ड बदलने पर ग्राहक को सीधा ईमेल जाता है सारे रीट्राई खत्म होने पर सदस्यता halted हो जाती है और मैन्युअल चार्ज करना पड़ता है |
पैसे बाहर भेजना
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| वेतन और वेंडर भुगतान एक ही डैशबोर्ड से भेजना | फाइनेंस टीम और छोटे ऑपरेशन्स दल | RazorpayX → Payouts → Fund Account चुनें → भुगतान भेजें | बैंक डाउनटाइम में पेआउट खुद-ब-खुद रुक जाता है |
| 5XX एरर पर बिना डबल-पेमेंट के दोबारा कोशिश | डेवलपर जो पेआउट API इस्तेमाल कर रहे हैं | वही idempotency key और वही रीक्वेस्ट बॉडी दोबारा भेजें, 7 दिन के भीतर | दोहरा भुगतान होने की गारंटी नहीं दी जाती – रेज़रपे इसे रोकता है अलग बॉडी भेजने पर रीक्वेस्ट सीधे रिजेक्ट होती है |
| बिना बैंक डिटेल जाने पेआउट लिंक भेजना | जिन ठेकेदारों/एकमुश्त वेंडरों की बैंक जानकारी नहीं है | Payout Links बनाएं → लिंक भेजें → ठेकेदार खुद अपनी डिटेल भरे | लिंक की समय-सीमा खत्म होने पर दोबारा भेजना पड़ता है |
भारत के बाहर से लेनदेन
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| 160 से ज़्यादा करेंसी में विदेशी ग्राहकों से भुगतान लेना | निर्यातक और ऐसी सेवा कंपनियां जिनके ग्राहक विदेश में हैं | International Payments सक्षम करें → Payment Links या Payment Pages इस्तेमाल करें | 3D Secure 2.0 इंटरनैशनल कार्ड्स के लिए भी काम करता है सेटलमेंट भारतीय बैंक खाते में INR में ही होता है |
| बिना भारत में रजिस्टर हुए, भारतीय ग्राहकों से पैसे लेना | विदेशी (गैर-भारतीय) कारोबार | Feature Request फॉर्म भरें → खाते पर सुविधा सक्रिय होने का इंतज़ार करें | निपटान सीधे विदेशी बैंक खाते में होता है यह ऑन-डिमांड सुविधा है, हर किसी के लिए अपने-आप सक्रिय नहीं होती |
पेरोल और कम्प्लायंस
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| PF, ESI, TDS का भुगतान अपने आप कट जाना | HR और फाइनेंस टीम जो हर महीने का हिसाब खुद नहीं करना चाहती | Payroll Dashboard → Company Details → Payments & Compliance सेटअप करें | TDS हर महीने की 7 तारीख को अपने आप जमा होता है शुरुआती रजिस्ट्रेशन खुद करानी होती है – रेज़रपे केवल भुगतान संभालता है |
| कर्मचारी को कम ब्याज पर लोन देना और EMI काटना | कंपनियां जो कर्मचारी-कल्याण योजना चलाती हैं | Payroll → Loans → ADD NEW LOAN → डिस्बर्स करें | फ्लैट या घटती ब्याज दर – दोनों में चुनाव संभव बिना बैलेंस के लोन डिस्बर्स नहीं होता |
| बायोमेट्रिक डिवाइस से हाज़री सीधे पेरोल में जोड़ना | फैक्ट्री और दुकान जैसे ऑफलाइन स्टाफ वाले कारोबार | CAMS डिवाइस खरीदें → Payroll Integration पेज पर सर्विस टैग और ऑथ टोकन डालें | सिंक होने में एक घंटे तक लग सकता है |
डेवलपर और ऑटोमेशन टूल्स
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| WhatsApp पर बुकिंग और पेमेंट लिंक एक साथ चलाना | सैलून, क्लिनिक जैसे अपॉइंटमेंट-आधारित कारोबार | n8n Community Node → WhatsApp/Instagram → Razorpay Payment Link नोड जोड़ें | हफ्ते में लगभग 10 घंटे की मैनुअल बुकिंग बचती है n8n वर्कफ़्लो खुद बनाना पड़ता है, तैयार टेम्पलेट नहीं मिलता |
| रोज़ाना सेटलमेंट डेटा अपने आप शीट में डालना | फाइनेंस टीम जो मिलान (reconciliation) में घंटों लगाती है | n8n → Cron (रोज़ सुबह) → Fetch Settlements → Google Sheets → Slack सूचना | रोज़ाना मिलान 2-4 घंटे से घटकर कुछ मिनट का रह जाता है |
| सपोर्ट टीम को डैशबोर्ड लॉगिन दिए बिना पेमेंट डिटेल दिखाना | बड़ी टीमें जो डैशबोर्ड एक्सेस सीमित रखना चाहती हैं | आंतरिक टूल → n8n वेबहुक → Fetch Payment by id | रोज़ाना 30-60 मिनट की डैशबोर्ड-खोज बचती है |
Chapter 2
कौन से कागज़ात असल में चाहिए, और सूची क्यों बदलती है
रीना ने जब दस्तावेज़ अपलोड करने शुरू किए, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनकी दुकान 'Sole Proprietorship' यानी एकल स्वामित्व की श्रेणी में आती है – और इस श्रेणी के लिए मांगे गए कागज़ात किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से बिल्कुल अलग हैं।
रेज़रपे कारोबार को बारह से ज़्यादा श्रेणियों में बांटता है – एकल स्वामित्व, पार्टनरशिप, LLP, प्राइवेट/पब्लिक लिमिटेड, ट्रस्ट, HUF, सोसाइटी, सरकारी संस्था, न्यायिक व्यक्ति (जैसे मंदिर या विश्वविद्यालय), स्थानीय प्राधिकरण, सेक्शन 8 कंपनी, और बिना रजिस्ट्रेशन वाले व्यक्ति जैसे फ्रीलांसर या इन्फ्लुएंसर। हर श्रेणी की अपनी दस्तावेज़ सूची है, इसलिए 'रेज़रपे को क्या चाहिए' का कोई एक जवाब नहीं है – जवाब आपके कारोबार के प्रकार पर टिका है।
एक नियम हर श्रेणी में एक जैसा रहता है: PAN कार्ड और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के पते के प्रमाण (आधार या पासपोर्ट) पर एक ही व्यक्ति का नाम होना चाहिए। यह छोटी-सी शर्त कई आवेदन बार-बार अटकाती है।
कारोबार की श्रेणी से आगे, यह भी देखा जाता है कि आप किस उत्पाद-वर्ग में हैं। खाद्य पदार्थ बेचने वालों को FSSAI लाइसेंस चाहिए, शेयर बाज़ार सलाहकार सेवाओं को SEBI सर्टिफिकेट, आयुर्वेदिक या हर्बल उत्पादों को AYUSH विनिर्माण लाइसेंस, फॉरेक्स कारोबार को FEMA रजिस्ट्रेशन और FFMC सर्टिफिकेट, और सोना-चांदी बेचने वालों को हॉलमार्क प्रमाणपत्र। यह अतिरिक्त सूची इसलिए है क्योंकि नियामक जोखिम हर कारोबार में एक जैसा नहीं होता।
ट्रस्ट के मामले में एक और बारीकी है – 12A/80G या 10AC इनकम टैक्स लिंक मांगा जाता है, और अगर आपके पास 10A है (10AC नहीं), तो एक अलग वचन-पत्र (undertaking letter) देना पड़ता है। यह वह विस्तार है जो साइट के पहले पेज पर नहीं, बल्कि दस्तावेज़ों की गहराई में मिलता है।
एक बार दस्तावेज़ सही श्रेणी के मुताबिक जमा हो जाएं, तो अगला सवाल यह नहीं रहता कि खाता चलेगा या नहीं – बल्कि यह कि उस खाते से आप ग्राहकों को किस तरह चार्ज करेंगे: एक बार में, या बार-बार। यही अगले अध्याय का विषय है।
Chapter 3
एक बार की बिक्री को नियमित सदस्यता में बदलना
एक छोटी SaaS कंपनी के फाउंडर अर्जुन को हर महीने अपने ग्राहकों से मैन्युअल रूप से पैसे मांगना पड़ता था। वे चाहते थे कि यह अपने आप हो – बिना हर बार फोन करने के।
इसके लिए रेज़रपे पर पहले एक Plan बनाया जाता है, जिसमें राशि और बिलिंग साइकल तय होता है – मासिक, साप्ताहिक या वार्षिक। फिर उस Plan से एक Subscription जोड़ी जाती है, जिसमें क्वांटिटी (जैसे कितने यूज़र) और कुल बिलिंग साइकल की संख्या तय होती है।
ग्राहक पहली बार भुगतान अधिकृत करता है – इसे 'authenticated' अवस्था कहा जाता है – और उसके बाद हर साइकल पर अपने आप चार्ज होता रहता है। भुगतान के तरीके भी एक जैसे नहीं रहते: कार्ड, UPI ऑटोपे और Emandate तीनों में अलग-अलग नियम लागू होते हैं। जैसे UPI आधारित सदस्यता में ग्राहक खुद पॉज़ और कैंसल कर सकता है, जबकि कार्ड आधारित सदस्यता में यह नियंत्रण व्यापारी के हाथ में ज़्यादा रहता है।
अगर बीच में कोई ग्राहक प्लान बदलना चाहे – जैसे बेसिक से एडवांस्ड पर जाना – तो सदस्यता को तुरंत या मौजूदा साइकल के अंत में अपडेट किया जा सकता है। अपग्रेड में अतिरिक्त राशि का इनवॉइस बनता है; डाउनग्रेड में क्रेडिट नोट के ज़रिए बचा हुआ पैसा वापस होता है। एक छोटी लेकिन असल में मायने रखने वाली शर्त: यदि दोनों प्लान के बीच का अंतर आधे रुपये से कम है, तो अपडेट फेल हो जाता है।
एक बात जो शुरुआत में समझ लेना ज़रूरी है: created या pending अवस्था में सदस्यता को अपडेट नहीं किया जा सकता – केवल authenticated और active अवस्था में। अगर आपका ग्राहक अभी पहला भुगतान भी नहीं कर पाया, तो प्लान बदलने की कोशिश करना बेकार जाएगा; पहले उसे सक्रिय अवस्था में लाना होगा।
यहां तक सब कुछ ठीक चलने पर काम करता है। लेकिन हर महीने कुछ भुगतान फेल भी होते हैं – कार्ड एक्सपायर हो जाना, बैलेंस कम होना, बैंक का ब्लॉक कर देना। उस स्थिति में क्या होता है, यही अगला अध्याय बताता है।
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Chapter 4
जब पेमेंट फेल हो जाए, तो आगे क्या होता है
महीने की पहली तारीख को अर्जुन की कंपनी के एक ग्राहक का कार्ड कट नहीं पाया – बैलेंस कम था। सदस्यता तुरंत बंद नहीं हुई, बल्कि 'pending' अवस्था में चली गई।
इस pending अवस्था में रेज़रपे अगले दिन अपने आप दोबारा कोशिश करता है। साथ ही ग्राहक को एक ईमेल भेजा जाता है जिसमें कार्ड बदलने का लिंक होता है। अगर retry में सफलता मिलती है, तो सदस्यता वापस active हो जाती है और आगे के बिलिंग साइकल पर कोई असर नहीं पड़ता।
अगर सारी कोशिशें विफल हो जाएं, तो सदस्यता 'halted' अवस्था में चली जाती है। यहाँ एक बारीकी है जो आसानी से चूक जाती है: halted अवस्था में भी इनवॉइस बनते रहते हैं, पर उन्हें अपने आप चार्ज नहीं किया जाता – व्यापारी को मैन्युअल रूप से चार्ज करना पड़ता है, या ग्राहक को कार्ड बदलने के लिए राज़ी करना पड़ता है।
वेबहुक (subscription.pending और subscription.halted) सक्षम करना यहीं काम आता है। बिना इन्हें सुने, व्यापारी को यह पता ही नहीं चलेगा कि किस ग्राहक की सेवा अब रोकी जानी चाहिए और किसकी जारी रहनी चाहिए।
UPI और Emandate के लिए retry का तरीका थोड़ा अलग है। अगर चार्ज का दिन बैंक अवकाश पर पड़ता है, तो रेज़रपे एक दिन पहले चार्ज करता है; अगर वह दिन और उससे पहला दिन दोनों अवकाश हों, तो तीन दिन पहले। यह बारीकी छोटी लगती है, पर महीने के आखिरी हफ्ते में शेड्यूल गड़बड़ाने से बचाती है।
एक बात ध्यान देने की है: घरेलू कार्ड को मैन्युअल रूप से दोबारा चार्ज नहीं किया जा सकता – यह सुविधा केवल कुछ स्थितियों के लिए है। जब बात सदस्यता की सीमा से आगे बढ़ती है – यानी पैसे भेजने की, न कि लेने की – तो नियम पूरी तरह बदल जाते हैं। यही अगला विषय है।
Chapter 5
पैसे बाहर भेजना, और बैंक जवाब न दे तो क्या करें
जब अर्जुन की टीम बढ़ी, तो हर महीने वेंडरों और फ्रीलांसरों को पैसे भेजना एक अलग सिरदर्द बन गया – अलग-अलग बैंक खातों में मैन्युअल NEFT करना, हर बार UTR नंबर ट्रैक करना।
RazorpayX के Payouts इसी काम के लिए हैं – एक ही डैशबोर्ड से किसी भी बैंक खाते, UPI ID या कार्ड में पैसे भेजना, बिना अलग-अलग बैंक पोर्टल में लॉगिन किए। पहला कदम है Fund Account जोड़ना – यानी जिस खाते में पैसा जाना है, उसकी जानकारी एक बार सेव करना।
पर बैंकिंग सिस्टम कभी-कभी अटकता है। जब किसी लाभार्थी बैंक, NPCI या पार्टनर बैंक में तकनीकी गड़बड़ी होती है, तो 5XX एरर आता है। यहाँ रेज़रपे की idempotency व्यवस्था असली काम करती है: अगर आप वही idempotency key और वही रीक्वेस्ट बॉडी 7 दिन के भीतर दोबारा भेजें, तो सिस्टम गारंटी देता है कि भुगतान दोबारा प्रोसेस नहीं होगा, चाहे पहला प्रयास असल में सफल हो गया हो।
अनुशंसित तरीका है – 1 मिनट, फिर 2 मिनट, फिर 5 मिनट के अंतराल पर तीन बार दोबारा कोशिश करना। तीन बार के बाद रुक जाना चाहिए, और कम से कम 1 घंटे इंतज़ार करने के बाद ही उस पेआउट को 'failed' मानना चाहिए – जल्दबाज़ी में मानने से गलत रिकॉर्ड बन सकता है, जबकि पैसा असल में पहुँच चुका हो।
एक और स्थिति है जब लाभार्थी की बैंक जानकारी ही उपलब्ध न हो – जैसे किसी नए ठेकेदार को पहली बार भुगतान करना है, पर उसका खाता नंबर अभी नहीं मिला। Payout Links यहाँ काम आते हैं: लिंक भेज दें, ठेकेदार खुद अपनी बैंक डिटेल भरे, और भुगतान अपने आप प्रोसेस हो जाए। एक शर्त: अगर एक्सपायरी सुविधा पहले से सक्षम नहीं है, तो लिंक की समय-सीमा वाला वेबहुक काम नहीं करेगा।
अब तक बात भारत के भीतर की रही। लेकिन कई कारोबारों के ग्राहक विदेश में बैठे होते हैं, और वहां पैसे भेजना-पाना अलग नियमों से चलता है – यही अगले अध्याय का विषय है।
Chapter 6
भारत के बाहर से पैसे पाना
एक डिज़ाइन एजेंसी जो अमेरिका और यूरोप के ग्राहकों के लिए काम करती है, हर महीने PayPal की फीस काटकर बाकी पैसा पाती थी – और हर ट्रांसफर में लगने वाला समय भी अलग था।
रेज़रपे 160 से ज़्यादा विदेशी करेंसी में भुगतान लेने की सुविधा देता है, और इंटरनैशनल कार्ड्स के लिए 3D Secure 2.0 सुरक्षा भी जुड़ी है। भारतीय कारोबार इसे Payment Gateway, Payment Pages, Payment Links या Invoices के ज़रिए इस्तेमाल कर सकते हैं। सेटलमेंट हमेशा भारतीय बैंक खाते में, INR में होता है – यानी विदेशी ग्राहक ने डॉलर में भुगतान किया हो, आखिर में आपके खाते में रुपया आता है।
जो भारतीय कारोबार बिना अतिरिक्त कागज़ी काम के विदेश से पैसे लेना चाहते हैं, वे International Bank Transfer यानी MoneySaver Export Account का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके दो तरीके हैं – Local Currency Bank Transfer, जिसमें विदेशी ग्राहक अपने स्थानीय बैंक से सीधे ट्रांसफर करता है, और Swift Transfer, जो पूरी दुनिया से काम करता है।
जो कंपनी भारत में रजिस्टर नहीं है, पर उसके ग्राहक भारत में हैं – वह विपरीत दिशा में इस्तेमाल कर सकती है: भारतीय ग्राहकों से कार्ड, UPI या नेटबैंकिंग से पैसे लेना, और सेटलमेंट अपने विदेशी बैंक खाते में पाना। यह सुविधा 'on-demand' है यानी अपने आप हर खाते पर सक्रिय नहीं होती – इसके लिए अलग से एक फॉर्म भरना पड़ता है।
एक बात जो अक्सर पहली बार में भुगतान फेल कर देती है: अगर ग्राहक का ईमेल या फोन नंबर डमी (टेस्ट के लिए बनाया गया) है, तो इंटरनैशनल भुगतान सीधे फेल हो जाता है। यह छोटी-सी गलती इंटीग्रेशन टेस्टिंग के दौरान सबसे ज़्यादा दिखती है।
अब तक हमने पैसे आने और जाने की बात की। लेकिन किसी भी बढ़ते कारोबार के लिए एक तीसरा मोर्चा भी होता है – अपने कर्मचारियों को वेतन देना, और उसके साथ आने वाले सरकारी हिसाब-किताब को संभालना। यही अगला अध्याय है।
Chapter 7
पेरोल चलाना, बिना कम्प्लायंस ऑफिसर बने
रीना की दुकान अब पाँच कर्मचारियों तक पहुँच गई थी, और हर महीने PF, ESI, प्रोफेशनल टैक्स और TDS का हिसाब अलग-अलग रखना उनकी सबसे बड़ी सिरदर्दी बन गया था।
Payroll Dashboard पर कंपनी की Payments & Compliance सेटिंग एक बार सेट करने पर, TDS, PF, ESI और PT (प्रोफेशनल टैक्स) का भुगतान हर महीने अपने आप कट जाता है और सही तारीख पर जमा हो जाता है। TDS हर महीने की 7 तारीख को जमा होता है (मार्च के लिए 30 अप्रैल), PF की 15 तारीख को, ESI की 7 तारीख को।
एक बात साफ़ समझ लेनी चाहिए: पेरोल इन भुगतानों को संभालता है, पर शुरुआती रजिस्ट्रेशन नहीं करता – PF, ESI या PT के लिए संस्था को खुद रजिस्टर कराना पड़ता है, आमतौर पर किसी CA पार्टनर के ज़रिए। इसे 'compliance payments' और 'initial registration' के बीच का फ़र्क समझना ज़रूरी है – दोनों एक ही चीज़ नहीं हैं।
कर्नाटक में काम करने वाले कारोबारों के लिए एक अलग नियम लागू है – राज्य सरकार ने PT पोर्टल पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू किया है, जिसकी वजह से रेज़रपे कर्नाटक के कर्मचारियों का PT भुगतान अपने आप नहीं कर पाता। इस राज्य के लिए यह भुगतान मैन्युअल रूप से e-Prerana पोर्टल पर करना पड़ता है, हर महीने की 20 तारीख से पहले।
इसके अलावा दो सुविधाएं ऐसी हैं जो साइट के मुख्य पेज पर कम दिखती हैं। पहली, कर्मचारी लोन मॉड्यूल – जिसमें फ्लैट या घटती ब्याज दर चुनी जा सकती है, और डिफ़ॉल्ट EMI स्किप भी किया जा सकता है। दूसरी, CAMS बायोमेट्रिक डिवाइस का इंटीग्रेशन – जिससे उंगली या चेहरे की पहचान से हाज़री सीधे पेरोल में जुड़ जाती है, बिना किसी अलग सॉफ्टवेयर के।
पेरोल एक बार सेट हो जाए तो यह अपने आप चलता रहता है। पर हर सुविधा की एक सीमा होती है, और वह सीमा अक्सर तब पता चलती है जब बहुत ज़रूरत होती है। अब बात उन सीमाओं की, जो पूरी किताब में सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं।
Chapter 8
रेज़रपे कहाँ रुक जाता है, और बाकी काम आपको खुद करना है
किताब के इस मोड़ तक रीना और अर्जुन दोनों ने अपने-अपने कारोबार में रेज़रपे को गहराई से इस्तेमाल कर लिया था। पर दोनों को एक ही सवाल का सामना करना पड़ा: 'अगर कुछ गलत हुआ, तो यह किसकी ज़िम्मेदारी है?'
पहली सीमा – रजिस्ट्रेशन। PF, ESI, PT जैसी योजनाओं की शुरुआती सरकारी रजिस्ट्रेशन रेज़रपे नहीं करता, केवल उसके बाद के भुगतान और फाइलिंग संभालता है। दूसरी – नियमित रिपोर्ट। हर रिपोर्ट CSV में डाउनलोड नहीं हो सकती, और पेरोल शून्य (nil) रिटर्न फाइल नहीं करता – अगर किसी महीने कोई कटौती नहीं हुई, तो लेजर रिपोर्ट में कुछ भी नहीं दिखेगा, यह मान लेना गलत होगा कि सब ठीक है।
तीसरी सीमा राज्य-विशेष है – कर्नाटक का PT भुगतान अभी भी मैन्युअल है, और यह किसी तकनीकी खराबी की वजह से नहीं, बल्कि राज्य सरकार के अपने पोर्टल में बदलाव की वजह से है। जो कारोबार कई राज्यों में फैले हैं, उन्हें यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि हर राज्य का हिसाब पूरी तरह अपने आप होगा।
चौथी सीमा भुगतान के तरीकों में है – घरेलू कार्ड को मैन्युअल रूप से दोबारा चार्ज नहीं किया जा सकता, और सदस्यता की created या pending अवस्था में कोई बदलाव नहीं हो सकता। यह किसी बग की वजह से नहीं है – यह डिज़ाइन का हिस्सा है, और इसे जान लेना बेहतर है, टकराने से पहले।
अगर आपका लक्ष्य केवल भुगतान लेना है, बिना सदस्यता या पेरोल के झमेले के, तो अध्याय एक और दो ही आपके लिए काफ़ी हैं – KYC पूरी करें, चेकआउट लगाएं, आगे बढ़ें। अगर आपका कारोबार SaaS या सदस्यता आधारित है, तो अध्याय तीन और चार दोबारा पढ़ना फ़ायदेमंद रहेगा – वहीं halted अवस्था की समझ बचाती है। अगर आपकी टीम पांच से ज़्यादा लोगों की है, तो पेरोल का अध्याय सिर्फ पढ़ना काफ़ी नहीं, कर्नाटक जैसे राज्य-विशेष नियम को अभी नोट कर लेना बेहतर है।
एक आख़िरी बात। रेज़रपे लगातार बदल रहा है – नए TDS/TCS सेक्शन कोड, नई KYC प्रक्रिया, नए वेबहुक। जो नियम आज सही है, वह अगले साल के बजट में बदल सकता है। इसलिए यह किताब आपको रास्ता दिखाती है, हर मील का पत्थर नहीं – असल संख्या और तारीख हमेशा साइट के अपने डैशबोर्ड और हेल्प सेंटर पर जांच लें।
Questions readers actually ask
क्या फ्रीलांसर या व्यक्तिगत लोग बिना रजिस्टर्ड कंपनी के रेज़रपे खाता खोल सकते हैं?
हां, 'Individual/Unregistered Businesses' एक अलग मान्य श्रेणी है, जिसमें फ्रीलांसर, इन्फ्लुएंसर और छोटी ऑफलाइन दुकानें आती हैं – इनके लिए दस्तावेज़ों की सूची रजिस्टर्ड कंपनियों से छोटी और अलग है।
मेरा अकाउंट एक्टिवेशन फॉर्म भरे हुए काफ़ी समय हो गया, फिर भी सक्रिय नहीं हुआ – क्या करूं?
पहले खाते की स्थिति (under_review, needs_clarification, suspended, rejected) जांचें – अक्सर 'needs_clarification' अवस्था में कोई सूचना पहले से इंतज़ार कर रही होती है जिसका जवाब देना छूट गया है। अगर स्थिति साफ़ न हो तो सपोर्ट से संपर्क करना ही रास्ता है।
क्या सदस्यता (Subscription) को बीच में कैंसल किया जा सकता है?
हां, व्यापारी और ग्राहक दोनों इसे कैंसल कर सकते हैं। कैंसल होने पर सदस्यता 'cancelled' अवस्था में जाती है और subscription.cancelled वेबहुक भेजा जाता है, जिससे व्यापारी को इसकी सूचना मिल जाती है।
UPI ऑटोपे से चलने वाली सदस्यता को क्या ग्राहक खुद पॉज़ या कैंसल कर सकता है?
हां, UPI आधारित सदस्यता में यह नियंत्रण ग्राहक के हाथ में ज़्यादा है – वह खुद इसे पॉज़, रिज्यूम या कैंसल कर सकता है, जबकि कार्ड आधारित सदस्यता में यह नियंत्रण मुख्यतः व्यापारी के पास रहता है।
पेआउट में 5XX एरर आने पर क्या दोबारा पैसे कट सकते हैं?
नहीं, बशर्ते आप वही idempotency key और वही रीक्वेस्ट बॉडी दोबारा भेजें – साइट इसकी गारंटी देती है कि पेआउट दोबारा प्रोसेस नहीं होगा। अलग बॉडी भेजने पर रीक्वेस्ट सीधे रिजेक्ट हो जाती है।
क्या रेज़रपे विदेशी करेंसी में सीधे भुगतान लेता है, या रुपये में बदलकर देता है?
भारतीय कारोबार के लिए सेटलमेंट हमेशा भारतीय बैंक खाते में INR में होता है, चाहे ग्राहक ने किसी भी विदेशी करेंसी में भुगतान किया हो। विदेशी (गैर-भारतीय) कारोबार के लिए यह उल्टा है – सेटलमेंट उनके अपने विदेशी बैंक खाते में होता है।
कर्नाटक के कर्मचारियों का प्रोफेशनल टैक्स अभी क्यों अपने आप नहीं कटता?
कर्नाटक सरकार ने सितंबर 2024 से PT पोर्टल पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) लागू किया है, जिसकी वजह से पेरोल इसे अपने आप नहीं भर पाता। यह भुगतान अभी e-Prerana पोर्टल पर मैन्युअल रूप से करना पड़ता है।
क्या पेरोल शुरुआती PF या ESI रजिस्ट्रेशन भी करता है?
नहीं। पेरोल केवल रजिस्ट्रेशन के बाद के भुगतान और फाइलिंग संभालता है – शुरुआती रजिस्ट्रेशन के लिए संस्था को खुद या किसी CA पार्टनर की मदद से आगे बढ़ना पड़ता है।
एक बार पेरोल एक्ज़िक्यूट हो जाने के बाद क्या उसमें बदलाव हो सकता है?
नहीं, एक्ज़िक्यूशन के बाद पेरोल में बदलाव संभव नहीं है। बदलाव केवल 'finalised' अवस्था में, एक्ज़िक्यूट होने से पहले, 'MAKE CHANGES' विकल्प से किया जा सकता है।
क्या किसी कर्मचारी को कंपनी की तरफ़ से लोन दिया जा सकता है, और उस पर टैक्स कैसे लगता है?
हां, Payroll के Loans मॉड्यूल से लोन बनाया और डिस्बर्स किया जा सकता है। SBI के लोन ब्याज दर और कंपनी की दर के बीच का अंतर 'perquisite' यानी अतिरिक्त लाभ माना जाता है, जिस पर कर्मचारी के टैक्स ब्रैकेट के हिसाब से टैक्स लगता है।
क्या रेज़रपे API सीधे क्लाइंट-साइड (जैसे वेबसाइट के ब्राउज़र) से कॉल की जा सकती है?
ऑर्डर बनाना और सिग्नेचर वेरिफिकेशन हमेशा सर्वर-साइड से होना चाहिए – साइट इसे सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य मानती है। क्लाइंट-साइड से ऑर्डर बनाना कभी सुझाया नहीं गया है।
अगर बायोमेट्रिक डिवाइस Payroll से सिंक न हो, तो क्या करें?
पहले डिवाइस की इंटरनेट कनेक्टिविटी जांचें, फिर callback URL और auth token सही तरीके से डाले गए हैं या नहीं। साइट के अनुसार नए डिवाइस को पूरी तरह सिंक होने में एक घंटे तक का समय लग सकता है – इसलिए तुरंत गड़बड़ी न मानें।
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