By RamthaMedia
RamthaMedia Free eBooks · August 2026
Price: Priceless
· 13 min read
Preface
जब कोई पहली बार Midjourney पर प्रॉम्प्ट लिखता है, तो सामने आई तस्वीर अक्सर वही नहीं होती जो दिमाग में थी – रंग अलग, चेहरा अलग, माहौल अलग। यह किताब उसी फासले को पाटने के लिए है। हर सेटिंग की गहराई से पड़ताल करते हुए – पर्सनलाइज़ेशन प्रोफाइल से लेकर ओमनी-रेफरेंस, कैरेक्टर कंसिस्टेंसी, ड्राफ्ट मोड और इमेज-से-वीडियो वर्कफ़्लो तक – यह बताती है कि किसी नतीजे को टक्कर से नहीं, बल्कि सोच-समझकर कैसे तय किया जाए। पढ़ने के बाद पाठक अपनी पसंद को मॉडल तक सही तरीके से पहुँचा पाएगा, हर बार अंदाज़े पर निर्भर रहने के बजाय।
Chapter 1
प्रॉम्प्ट बार जितना खाली दिखता है, उतना है नहीं
एक नया उपयोगकर्ता प्रॉम्प्ट बार में सिर्फ़ शब्द टाइप करके एंटर दबाता है, और सामने आई तस्वीर देखकर सोचता है कि यही सब कुछ है। असल में उस एक पंक्ति के पीछे कई परतें छिपी होती हैं – पर्सनलाइज़ेशन टॉगल, ड्राफ्ट मोड बटन, रेफरेंस बिन, कन्वर्सेशनल और वॉइस मोड – जो शब्दों के बाहर भी नतीजे को आकार देती हैं।
जब कोई प्रॉम्प्ट लिखता है, तो उसमें बहुत कुछ 'अनकहा' रह जाता है – रंग की गहराई, चेहरे का भाव, कैमरा एंगल। यह खाली जगह किसी न किसी तरह भरी ज़रूर जाती है, बस सवाल यही है कि किसकी पसंद से भरी जाए – मॉडल के औसत अंदाज़े से, या आपकी अपनी सौंदर्य-समझ से।
यही वह जगह है जहाँ से यह किताब शुरू होती है: प्रॉम्प्ट बार का हर हिस्सा एक नियंत्रण बिंदु है, और अगले अध्याय उन्हें एक-एक करके खोलते हैं।
What you can actually do here
नीचे वे तरीके हैं जिनसे एक तस्वीर सिर्फ़ 'बन' नहीं जाती, बल्कि आपकी सोच के करीब लाई जाती है – हर एक का रास्ता साफ़ बताया गया है।
अपनी पसंद सिखाना
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| पर्सनलाइज़ेशन प्रोफाइल बनाना ताकि मॉडल आपकी सौंदर्य-पसंद समझे | नियमित रूप से बनाने वाले, जिन्हें हर बार अंदाज़ा नहीं लगाना है | प्रॉम्प्ट बार में –p जोड़ें, या सेटिंग्स में पर्सनलाइज़ेशन ऑन करें | वोट देने के साथ-साथ लगातार बेहतर होता है असर दिखने में शुरू में कुछ रेटिंग्स लगती हैं |
| मूडबोर्ड से माहौल और शैली तय करना | किसी प्रोजेक्ट के लिए एक जैसा टोन चाहने वाले | Personalize पेज पर मूडबोर्ड बनाएं, तस्वीरें जोड़ें | विविध तस्वीरें ज़्यादा रचनात्मक मिश्रण देती हैं संकरा मूडबोर्ड परिणाम को सीमित कर देता है |
चेहरा और चीज़ें बार-बार वही रखना
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| ओमनी-रेफरेंस से किसी चरित्र, वस्तु या वाहन को तस्वीर में डालना | कहानी या सीरीज़ बनाने वाले | प्रॉम्प्ट बार में तस्वीर खींचकर 'Omni-reference' बॉक्स में डालें | चेहरा, कपड़े और वस्तु तक सुरक्षित रह सकते हैं स्टाइलाइज़ और एक्सप वैल्यू ऊँची हो तो वेट भी बढ़ानी पड़ती है |
| कैरेक्टर रेफरेंस से पुराने Midjourney चरित्र को दोबारा इस्तेमाल करना | अपने बनाए किरदार को अलग सीन में रखने वाले | प्रॉम्प्ट के बाद –cref और चरित्र इमेज का URL | बाल, चेहरा, कपड़े तीनों साथ बने रह सकते हैं असली इंसानों की तस्वीरों पर अच्छे से काम नहीं करता |
तेज़ी से आगे बढ़ना
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| ड्राफ्ट मोड से कम लागत में कई विकल्प देखना | जल्दी-जल्दी विचार आज़माने वाले | प्रॉम्प्ट बार में ⚡ आइकॉन दबाएं या –draft लिखें | एक साथ चौबीस तस्वीरें कम रिज़ॉल्यूशन में मिलती हैं पूरी गुणवत्ता के लिए पसंदीदा तस्वीर को अलग से 'Vary' करना पड़ता है |
| बातचीत के अंदाज़ में प्रॉम्प्ट बदलना | टाइप करने के बजाय बोलकर सोचने वाले | चैट बबल आइकॉन से कन्वर्सेशनल मोड, फिर माइक से वॉइस मोड | बिना प्रॉम्प्ट फिर से लिखे बदलाव कहा जा सकता है वॉइस सेशन में सिर्फ़ हाल की इमेज और सेटिंग्स तक पहुँच मिलती है |
जब पहला ड्राफ्ट सही न लगे
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| एक्सटर्नल इमेज एडिटर से किसी भी तस्वीर को फिर से रंगना | किसी बाहरी तस्वीर को सुधारने या बदलने वाले | साइडबार में Edit बटन, फिर स्मार्ट सिलेक्शन से हिस्सा चुनें | किसी वस्तु पर क्लिक करके उसे हटाया जा सकता है बहुत छोटे हिस्से को बदलने का निर्देश ठीक से नहीं समझ पाता |
| रीटेक्सचरिंग से सीन की बनावट पूरी तरह बदलना | एक ही रचना को नई सतह और रोशनी में देखने वाले | एडिटर में रीटेक्सचर मोड चुनें | आकार वही रहता है, सामग्री बदल जाती है बहुत छोटे सिर वाले सीन में शरीर का अनुपात गड़बड़ हो सकता है |
तस्वीर से हरकत तक
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| किसी तस्वीर को 'Animate' करके वीडियो बनाना | स्टिल आर्ट को छोटी क्लिप में बदलने वाले | तस्वीर पर Animate बटन दबाएं, ऑटोमैटिक या मैनुअल चुनें | एक बार में चार पाँच-सेकंड की वीडियो मिलती हैं हाई मोशन में कभी-कभी हरकत टूटी-फूटी दिख सकती है |
| बाहर से लाई गई तस्वीर को शुरुआती फ्रेम बनाकर हिलाना | अपनी खुद की फ़ोटो को वीडियो में बदलने वाले | तस्वीर को प्रॉम्प्ट बार में खींचें, 'start frame' चुनें, मोशन प्रॉम्प्ट लिखें | स्थिर दृश्यों के लिए लो मोशन ज़्यादा भरोसेमंद रहता है कभी-कभी लो मोशन में हरकत बिल्कुल नहीं दिखती |
शैली को एक बार बनाना, बार-बार दोहराना
| Use | Who it fits | Where | Worth knowing |
|---|---|---|---|
| स्टाइल रेफरेंस से किसी तस्वीर का माहौल दूसरी तस्वीरों में लाना | पूरे प्रोजेक्ट में एक जैसी शैली रखने वाले | प्रॉम्प्ट के बाद –sref और रेफरेंस इमेज का URL | अलग-अलग विषयों पर भी एक ही शैली चिपकी रहती है वज़न ज़्यादा हो तो असली विषय दब सकता है |
| –sref random से नई अनजान शैलियाँ खोजना | नए विचारों की तलाश करने वाले | प्रॉम्प्ट के बाद –sref random लिखें, पसंद आए कोड को सहेजें | मिली शैली को दोबारा उसी कोड से बुलाया जा सकता है हर बार पूरी तरह अलग नतीजा आता है, पहले से तय नहीं होता |
Chapter 2
मॉडल को अपनी पसंद सिखाना
जब दो लोग एक ही प्रॉम्प्ट लिखते हैं, तो नतीजे अलग आ सकते हैं – और वजह पर्सनलाइज़ेशन है। हर बार मॉडल आपके पुराने वोट और पसंद की गई तस्वीरों को देखकर तय करता है कि अनकहे हिस्से किस तरह भरे जाएं।
पर्सनलाइज़ेशन ऑन करने के लिए प्रॉम्प्ट के बाद –p लिखा जाता है, या सेटिंग्स में इसे हमेशा के लिए चालू किया जा सकता है। एक बार चालू होने पर हर प्रॉम्प्ट के साथ एक कोड जुड़ जाता है, जिसे किसी और के साथ साझा भी किया जा सकता है ताकि वे भी उसी असर को अपने प्रॉम्प्ट पर आज़मा सकें।
इस सिस्टम को शुरू करने के लिए एक तय संख्या में पेयर-रैंकिंग या 'लाइक' चाहिए होते हैं, और यह लगातार बढ़ती रेटिंग के साथ और बेहतर होता जाता है। शुरुआती दौर में असर सूक्ष्म रहता है, यह जान लेना ठीक रहता है ताकि जल्दी निराशा न हो।
मूडबोर्ड इसी सिस्टम का विस्तार है – अलग-अलग तस्वीरें एक बोर्ड पर जोड़कर मॉडल को बताया जाता है कि किस तरह के दृश्य पसंद हैं। विविध बोर्ड ज़्यादा रचनात्मक मिश्रण देता है, जबकि संकरा बोर्ड नतीजे को एक दायरे में बांध देता है।
Chapter 3
एक ही चेहरे को हर फ्रेम में रखना
किसी कहानी या सीरीज़ के लिए एक ही किरदार को कई सीन में दिखाना पड़ता है, और बिना किसी सिस्टम के हर बार अलग चेहरा बन जाता है। ओमनी-रेफरेंस इसी समस्या का जवाब है – यह किसी भी चरित्र, वस्तु या वाहन को 'इसे मेरी तस्वीर में डालो' कहकर सीधे भेज देता है।
इसे इस्तेमाल करने के लिए तस्वीर को प्रॉम्प्ट बार के 'Omni-reference' हिस्से में खींचकर छोड़ा जाता है, और एक स्लाइडर से उसकी ताकत तय होती है। यह ताकत –ow नाम के पैरामीटर से भी नियंत्रित होती है, जो शून्य से लेकर सौ, और ज़रूरत पड़े तो एक हज़ार तक जा सकती है।
अगर स्टाइल बदलनी है – जैसे फोटो से एनिमे – तो वेट कम रखना बेहतर रहता है। पर अगर चेहरा या कपड़े ज़्यादा सुरक्षित रखने हैं, तो वेट को ऊँचा किया जा सकता है। हालांकि जब स्टाइलाइज़ या एक्सप की वैल्यू भी ऊँची हो, तो इन दोनों के साथ संतुलन बनाना पड़ता है, वरना असर एक-दूसरे को दबा देता है।
पुराने Midjourney किरदारों के लिए एक अलग रास्ता भी है – कैरेक्टर रेफरेंस, जिसमें –cref के बाद किरदार की तस्वीर का पता दिया जाता है। यह सबसे अच्छा तब काम करता है जब किरदार खुद Midjourney से ही बना हो; असली इंसानों की तस्वीरों पर यह भरोसे से काम नहीं करता।
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Chapter 4
सोच की रफ़्तार से आगे बढ़ना
जब विचार अभी साफ़ नहीं हुआ हो, तब हर तस्वीर को पूरी गुणवत्ता में बनाना समय और लागत दोनों बर्बाद करता है। ड्राफ्ट मोड इसी वजह से बनाया गया – यह एक साथ चौबीस तस्वीरें कम रिज़ॉल्यूशन में दिखाता है, जिनमें से पसंदीदा को 'Vary' दबाकर पूरी गुणवत्ता में बनाया जा सकता है।
ड्राफ्ट मोड चालू करने के लिए प्रॉम्प्ट बार में ⚡ आइकॉन दबाया जाता है, या –draft प्रॉम्प्ट के साथ जोड़ा जाता है। यह सामान्य मोड से आधे फास्ट-ऑवर लेता है, फिर भी चौबीस विकल्प एक साथ देता है – यही इसे विचार आज़माने का सबसे किफ़ायती तरीका बनाता है।
इसके साथ आया कन्वर्सेशनल मोड टाइपिंग की जगह बातचीत ले आता है – बिल्ली को उल्लू से बदलना हो या दिन को रात करना हो, यह सीधे कहकर किया जा सकता है। माइक बटन दबाकर इसे वॉइस मोड में भी बदला जा सकता है, जिसमें हाल की तस्वीरें और सेटिंग्स पहले से मौजूद रहती हैं।
जो तेज़ी सबसे ज़्यादा चाहिए हो, उसके लिए टर्बो मोड है – सामान्य से लगभग साढ़े तीन गुना तेज़, दोगुनी लागत पर। भीड़भाड़ वाले सत्र या समय की कमी में यही सही विकल्प रहता है।
Chapter 5
जब पहला नतीजा सही न लगे
बनी हुई तस्वीर में अक्सर कोई एक हिस्सा सही नहीं बैठता – बैकग्राउंड में कुछ ग़ैर-ज़रूरी, कोई वस्तु ग़लत जगह। इसे पूरी तरह फिर से बनाने की बजाय एडिटर के ज़रिए सिर्फ़ वही हिस्सा बदला जा सकता है।
एडिटर तक साइडबार के Edit बटन से या लाइटबॉक्स के भीतर 'Edit' बटन से पहुँचा जाता है। इसमें स्मार्ट सिलेक्शन नाम का टूल किसी वस्तु पर क्लिक करके उसे तुरंत हटाने में मदद करता है, और कई तस्वीरों को लेयर में डालकर कोलाज या नया रीटेक्सचर भी बनाया जा सकता है।
रीटेक्सचरिंग एक और तरीका है – यह सीन का आकार जैसा है वैसा रखते हुए उसकी रोशनी, सतह और सामग्री बदल देता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि बहुत छोटे हिस्से को बदलने का निर्देश या बहुत छोटा सिर वाला सीन कभी-कभी अनुपात बिगाड़ सकता है – इसलिए सिर को पहले से थोड़ा बड़ा रखना बेहतर रहता है।
यह सारा एडिटिंग पर्सनलाइज़ेशन, स्टाइल रेफरेंस और इमेज प्रॉम्प्टिंग के साथ भी काम करता है, जिसका मतलब है कि किसी तस्वीर को सुधारते समय भी आपकी तय की गई शैली बनी रहती है।
Chapter 6
स्थिर तस्वीर से चलते दृश्य तक
एक स्टिल तस्वीर बना लेने के बाद अगला सवाल यह उठता है – क्या इसे हरकत दी जा सकती है? इसका जवाब है 'Animate' बटन, जो तस्वीर को छोटी वीडियो क्लिप में बदल देता है। ऑटोमैटिक मोड खुद एक मोशन प्रॉम्प्ट बना लेता है, जबकि मैनुअल मोड में हरकत का ब्यौरा खुद लिखा जा सकता है।
लो मोशन और हाई मोशन के बीच चुनना पड़ता है। लो मोशन धीमे, स्थिर दृश्यों के लिए बेहतर है, पर कभी-कभी हरकत बिल्कुल नज़र नहीं आती। हाई मोशन ज़्यादा हरकत देता है, पर कभी-कभी उसमें छोटी-छोटी गड़बड़ियाँ भी आ जाती हैं।
एक बार वीडियो पसंद आने पर उसे 'extend' किया जा सकता है – हर बार लगभग चार सेकंड, और यह चार बार तक दोहराया जा सकता है। बाहर से लाई गई तस्वीर को भी 'start frame' बनाकर हिलाया जा सकता है, जिससे किसी असली फोटो को भी जीवंत बनाया जा सकता है।
एक शुरुआती दृश्य से एक तय अंत तक पहुँचने के लिए 'end frame' भी दिया जा सकता है, और लगातार दोहराई जाने वाली वीडियो के लिए 'loop' का विकल्प मौजूद है – दोनों ही किसी कहानी को गोल बंद करने में मदद करते हैं।
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Chapter 7
एक शैली को एक बार बनाना, हर जगह इस्तेमाल करना
किसी प्रोजेक्ट के सभी हिस्सों में एक जैसा माहौल चाहिए हो, तो हर बार अलग-अलग शब्दों से वही असर पाना मुश्किल होता है। स्टाइल रेफरेंस इसी समस्या का हल है – यह किसी एक तस्वीर की शैली को पकड़कर बार-बार अलग विषयों पर लागू कर देता है।
इसे इस्तेमाल करने के लिए प्रॉम्प्ट के बाद –sref और रेफरेंस तस्वीर का पता दिया जाता है। स्टाइल का असर –sw नाम के वेट से तय होता है – वेट जितना ऊँचा, शैली उतनी गहराई से चिपकती है, पर साथ ही असली विषय के दबने का ख़तरा भी बढ़ जाता है।
जब कोई पक्की शैली पहले से नहीं सोची गई हो, तो –sref random लिखकर अनजान शैलियाँ खोजी जा सकती हैं। जो कोड पसंद आए, उसे दोबारा –sref उसी कोड के साथ बुलाया जा सकता है, ताकि वही असर फिर से मिल सके।
कई मूडबोर्ड और स्टाइल रेफरेंस एक साथ भी मिलाए जा सकते हैं – जैसे कई कोड एक ही प्रॉम्प्ट में जोड़ना। इससे एक ऐसा मिश्रित माहौल बनता है जो किसी एक स्रोत से नहीं, बल्कि कई पसंदों के जोड़ से आता है।
Chapter 8
समुदाय कहाँ काम आता है, और यह किताब कहाँ रुकती है
Midjourney के भीतर एक्सप्लोर पेज, रैंकिंग पार्टियाँ और स्टाइल एक्सप्लोरर जैसे हिस्से समुदाय की राय से चलते हैं। जब कोई दो तस्वीरों में से एक चुनता है, तो यही वोट मॉडल की भविष्य की समझ और पर्सनलाइज़ेशन की नींव बनते हैं – यानी बाकी सबकी पसंद, अनजाने में, आपकी अपनी तस्वीर को भी थोड़ा प्रभावित करती है।
स्टाइल एक्सप्लोरर जैसे टूल में हर छोटी तस्वीर किसी शैली-कोड का नमूना होती है, जिसे 'Try Style' दबाकर अपने प्रॉम्प्ट पर आज़माया जा सकता है। यह किसी नई शैली को बिना पूरी तरह अंदाज़े में जाए परखने का तरीका है।
इन सामुदायिक प्रणालियों की एक सीमा भी है – रेटिंग और रैंकिंग पार्टियों के नतीजे लगातार बदलते रहते हैं, कभी-कभी बीच में ही नए मॉडल आ जाते हैं और पुराने बंद हो जाते हैं। यह किताब जो सिस्टम बताती है वे स्थिर सिद्धांत हैं, पर उनके ऊपर चलने वाला मॉडल हर कुछ हफ़्तों में बदल सकता है।
यहीं से यह किताब अपनी सीमा मान लेती है – बाकी सब मॉडल की मौजूदा स्थिति पर निर्भर है, और वह जानकारी सबसे भरोसे से आधिकारिक स्रोत पर ही मिलेगी। जो यहाँ सीखा गया, वह हर नए वर्जन के साथ आधार बना रहेगा, बस बटन और नाम कभी-कभी बदल सकते हैं।
Questions readers actually ask
क्या पर्सनलाइज़ेशन तुरंत असर दिखाता है?
नहीं, शुरू में यह हल्का और अस्थिर रहता है। स्थिरता के लिए कुछ रेटिंग्स ज़रूरी होती हैं, और ज़्यादा रेटिंग्स के साथ यह लगातार बेहतर होता जाता है।
ओमनी-रेफरेंस असली इंसानों की तस्वीर पर काम करता है?
यह मुख्य रूप से Midjourney से बने किरदारों के लिए बनाया गया है। असली फोटो पर इस्तेमाल करने पर नतीजा उतना भरोसेमंद नहीं रहता, ठीक वैसे ही जैसे सामान्य इमेज प्रॉम्प्टिंग में होता है।
ड्राफ्ट मोड की तस्वीरें अंतिम गुणवत्ता की होती हैं?
नहीं, ये कम रिज़ॉल्यूशन में आती हैं, विचार आज़माने के लिए। पसंदीदा तस्वीर को पूरी गुणवत्ता में लाने के लिए 'Vary' दबाना पड़ता है।
स्टाइल रेफरेंस और मूडबोर्ड में क्या फ़र्क़ है?
स्टाइल रेफरेंस एक तस्वीर की शैली पर केंद्रित रहता है, जबकि मूडबोर्ड कई तस्वीरों को मिलाकर एक व्यापक माहौल बनाता है। दोनों को साथ भी मिलाया जा सकता है।
वीडियो को कितनी बार बढ़ाया जा सकता है?
एक वीडियो को चार बार तक 'extend' किया जा सकता है, हर बार लगभग चार सेकंड जोड़कर।
हाई मोशन और लो मोशन में कब कौन चुनें?
स्थिर, धीमे दृश्यों के लिए लो मोशन बेहतर रहता है, पर कभी हरकत बिल्कुल नहीं दिखती। जहाँ कैमरा और विषय दोनों हिलें, वहाँ हाई मोशन चुना जाता है, हालांकि इसमें कभी-कभी छोटी गड़बड़ियाँ आ जाती हैं।
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